TCS Layoffs: पुणे में 2,500 कर्मचारियों को इस्तीफ़ा देने पर मजबूर किया गया, NITES ने सरकार से लगाई गुहार

TCS पर आरोप है कि पुणे कैंपस में 2,500 कर्मचारियों को जबरन इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया। NITES यूनियन ने महाराष्ट्र सरकार से मदद मांगी और इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट 1947 के तहत जांच की मांग की। पूरी खबर पढ़ें।

TCS

🚨 क्या हुआ TCS Layoffs में?

भारत की सबसे बड़ी IT कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) एक बड़े विवाद में आ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुणे कैंपस में लगभग 2,500 कर्मचारियों को ज़बरदस्ती इस्तीफ़ा देने पर मजबूर किया गया

कर्मचारी यूनियन NITES (Nascent Information Technology Employees Senate) का कहना है कि इस कदम से हज़ारों परिवार आर्थिक संकट में फँस गए हैं। प्रभावित कर्मचारियों में ज़्यादातर की उम्र 40 साल से अधिक है और वे पहले से ही होम लोन, बच्चों की पढ़ाई और अन्य ज़िम्मेदारियों का बोझ उठा रहे थे।


📢 NITES की महाराष्ट्र सरकार से अपील

NITES ने महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • कथित जबरन इस्तीफ़ों की जांच की जाए

  • Industrial Disputes Act, 1947 को लागू किया जाए, जो कर्मचारियों को अनुचित बर्खास्तगी से बचाता है

  • बिना कानूनी प्रक्रिया के कर्मचारियों को निकाले जाने पर रोक लगाई जाए

  • TCS मैनेजमेंट को जवाबदेह ठहराया जाए

यूनियन का कहना है कि IT कर्मचारियों को भी अन्य सेक्टर्स के वर्कर्स की तरह समान अधिकार मिलने चाहिए।


⚖️ कानूनी पहलू – Industrial Disputes Act, 1947

भारत में Industrial Disputes Act, 1947 एक महत्वपूर्ण कानून है, जो layoffs, retrenchments और terminations को नियंत्रित करता है।

NITES का आरोप है कि TCS ने कर्मचारियों को ज़बरन इस्तीफ़ा दिलवाकर इस कानून का उल्लंघन किया, जिससे उन्हें सेवरेन्स पे और अन्य लाभों से वंचित कर दिया गया।

अगर ये आरोप सच साबित होते हैं, तो यह भारत की IT इंडस्ट्री में नकारात्मक मिसाल बन सकता है, जहाँ अब तक जॉब सिक्योरिटी को स्थिर माना जाता था।


👥 कर्मचारियों पर असर

रिपोर्ट्स बताती हैं कि सबसे ज़्यादा असर मिड-लेवल और सीनियर कर्मचारियों पर पड़ा है, जो 15-20 साल से कंपनी में काम कर रहे थे।

अधिकांश की उम्र 40-50 साल के बीच है, जिससे दोबारा नौकरी पाना मुश्किल हो सकता है।

इसका असर सिर्फ़ आर्थिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक भी है:

  • अचानक नौकरी खोने से लोन डिफॉल्ट का खतरा

  • परिवारों में तनाव और असुरक्षा की भावना

  • बड़ी IT कंपनियों पर से विश्वास की कमी


🏛️ आगे क्या होगा?

अब सबकी नज़रें महाराष्ट्र सरकार पर हैं। अगर सरकार हस्तक्षेप करती है, तो यह मामला IT कर्मचारियों के अधिकारों के लिए कानूनी मिसाल बन सकता है।

दूसरी तरफ़, अगर TCS ने किसी गलत प्रैक्टिस से इनकार किया और छंटनी जारी रखी, तो ये संकेत हो सकते हैं कि भारतीय IT सेक्टर अब असुरक्षित दौर में प्रवेश कर रहा है।

अभी तक TCS ने इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।


🔎 निष्कर्ष

TCS पुणे layoffs ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं –
कर्मचारियों के अधिकार, कॉर्पोरेट जिम्मेदारी और सरकार की भूमिका को लेकर।

2,500 परिवारों को प्रभावित करने वाला ये मामला आने वाले समय में तय करेगा कि भारत की IT इंडस्ट्री में कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा

📢 News Heaven आपको इस developing story की हर अपडेट देता रहेगा।

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