भारत, चीन सहित दुनिया भर के Central Banks तेजी से अपने सोने के भंडार बढ़ा रहे हैं। जानिए इसके पीछे के आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण।

🌍 क्यों दुनिया भर के Central Banks सोना जमा कर रहे हैं — जानिए असली कारण
परिचय
हाल ही में दुनिया भर के Central Banks अभूतपूर्व गति से सोना खरीद रहे हैं। भारत से लेकर चीन और तुर्की तक, लगभग हर देश अपनी गोल्ड रिज़र्व नीति को मज़बूत कर रहा है। लेकिन आखिर क्यों? क्या वजह है कि बैंक अचानक से सोने के पीछे दौड़ पड़े हैं? आइए जानते हैं इस गोल्ड रश के पीछे की असली कहानी।
1️⃣ अमेरिकी डॉलर से दूरी बनाने की कोशिश
कई दशकों से अमेरिकी डॉलर को वैश्विक आरक्षित मुद्रा (Global Reserve Currency) का दर्जा प्राप्त है। मगर बढ़ती भू-राजनीतिक तनातनी, आर्थिक प्रतिबंधों का डर और डॉलर की अस्थिरता ने कई देशों को नए विकल्प खोजने पर मजबूर कर दिया है।
सोना एक निष्पक्ष और सार्वभौमिक संपत्ति है, जो किसी देश की मुद्रा नीति पर निर्भर नहीं करती। यही वजह है कि Central Banks अपने भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, ताकि मुद्रा में अचानक उतार-चढ़ाव से बचाव हो सके।
2️⃣ आर्थिक अनिश्चितता में सुरक्षा कवच
जब भी मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ती है या आर्थिक मंदी आती है, तो सोना हमेशा एक सेफ हेवन एसेट (Safe Haven Asset) के रूप में काम करता है।
Central Banks जानते हैं कि कागज़ी मुद्रा का मूल्य घट सकता है, लेकिन भौतिक सोना कभी अपना मूल्य नहीं खोता। यही कारण है कि वे अपने दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा जाल को सोने से मज़बूत कर रहे हैं।
सोने ने इतिहास में हर संकट—चाहे वह 2008 की मंदी हो या कोविड-19 की तबाही—में अपनी कीमत बनाए रखी है।
3️⃣ भू-राजनीतिक कारण: प्रतिबंधों और नियंत्रण से आज़ादी
रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन तनाव के बाद कई देशों ने यह महसूस किया कि पश्चिमी वित्तीय प्रणाली पर अत्यधिक निर्भरता खतरनाक हो सकती है।
सोना जमा करने से देशों को आर्थिक संप्रभुता (Monetary Sovereignty) मिलती है — यानी वे अपने भंडार और व्यापारिक निर्णयों पर बाहरी दबाव से मुक्त रहते हैं।
4️⃣ भारत और चीन बने अग्रणी
भारत और चीन इस वैश्विक गोल्ड रश में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार सोना खरीद रहा है, ताकि विदेशी मुद्रा संपत्ति पर निर्भरता घटाई जा सके।
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वहीं, पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) ने भी युआन को मज़बूत करने और अंतरराष्ट्रीय विश्वास बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीदा है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) के अनुसार, 2023 में Central Banks ने 1,000 टन से अधिक सोना खरीदा, जो पिछले 50 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ा है।
5️⃣ घटती डॉलर की बादशाहत
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रवृत्ति डॉलर-केंद्रित आर्थिक व्यवस्था से धीरे-धीरे दूरी बनाने का संकेत है।
हालांकि डॉलर अभी भी मजबूत है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी वैश्विक भंडार में लगातार घट रही है।
सोना एक ऐसा वैश्विक मानक (Universal Standard) बन रहा है जो राजनीति और सीमाओं से परे है।
निष्कर्ष
Central Banks की यह सोने की होड़ केवल आर्थिक रणनीति नहीं, बल्कि एक भू-राजनीतिक परिवर्तन भी है।
जब दुनिया अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, तब सोना एक बार फिर विश्वसनीय सुरक्षा प्रतीक के रूप में उभर रहा है।
इस अनिश्चित दुनिया में एक बात अब भी कायम है —
✨ “सोना कभी अपनी चमक नहीं खोता।”
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