Apple ने भारत से ₹88,730 करोड़ के iPhones निर्यात कर नया रिकॉर्ड बनाया। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान से उत्पादन और निर्यात में 75% की वृद्धि दर्ज की गई।

Apple ने बनाया नया रिकॉर्ड – भारत से ₹88,730 करोड़ के iPhones का निर्यात सिर्फ 6 महीनों में
नई दिल्ली, अक्टूबर 2025: टेक्नोलॉजी दिग्गज Apple Inc. ने भारत से iPhones का अब तक का सबसे बड़ा निर्यात कर इतिहास रच दिया है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी ने ₹88,730 करोड़ (10 अरब डॉलर) मूल्य के iPhones विदेशों में भेजे — जो पिछले साल की तुलना में लगभग 75% ज्यादा है।
यह उपलब्धि भारत की बढ़ती वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का प्रमाण है और देश को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के नए केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।
Apple और भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में ही Apple ने $1.25 बिलियन मूल्य के iPhones निर्यात किए, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह आंकड़ा मात्र $490 मिलियन था। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस सफलता का श्रेय भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति और Apple के स्थानीय विनिर्माण साझेदारों — Foxconn, Wistron और Pegatron — को जाता है, जिन्होंने उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
भारत: मैन्युफैक्चरिंग का नया पॉवरहाउस
भारत के बढ़ते निर्यात आंकड़े दिखाते हैं कि वह अब वैश्विक तकनीकी कंपनियों का पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बन रहा है। Production Linked Incentive (PLI) योजनाओं और बेहतर निवेश माहौल ने Apple जैसी कंपनियों के लिए यहां उत्पादन और निर्यात को आसान बना दिया है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इन निर्यातों से न केवल विदेशी मुद्रा अर्जित हो रही है, बल्कि हजारों नए रोजगार, तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला भी विकसित हो रही है।
China+1 रणनीति का असर
Apple का भारत में निर्यात बढ़ाने का फैसला उसकी “China+1 Strategy” का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी चीन पर निर्भरता कम कर अन्य देशों में उत्पादन का विस्तार कर रही है। भारत की स्थिर नीतियाँ और विशाल श्रमबल इसे दीर्घकालिक निवेश के लिए उपयुक्त बनाते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, 2027 तक भारत दुनिया में बिकने वाले iPhones का 25–30% उत्पादन कर सकता है, जिससे यह Apple का चीन के बाहर सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र बन जाएगा।
वैश्विक राजनीति और व्यापारिक चुनौतियाँ
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अमेरिका के बाहर बने iPhones पर 25% टैरिफ लगाने की चेतावनी के बावजूद, Apple की भारतीय गतिविधियाँ तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं।
यह दिखाता है कि भारत की नीतिगत स्थिरता और Apple की रणनीतिक दूरदर्शिता ने इस संभावित संकट को अवसर में बदल दिया है।
Apple और भारत का भविष्य
Apple की यह सफलता कहानी अभी शुरू हुई है। कंपनी भारत में न केवल iPhones बना रही है बल्कि AirPods और iPads जैसे अन्य उत्पादों के स्थानीय उत्पादन की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।
भारत में बढ़ती घरेलू मांग और निर्यात-उन्मुख उत्पादन के साथ, आने वाले वर्षों में Apple की भारतीय इकाई नई ऊँचाइयाँ छू सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत बुनियादी ढाँचा, सुधार और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करता है, तो वह वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग सुपरपावर बन सकता है।
🧭 निष्कर्ष
Apple के ₹88,730 करोड़ के रिकॉर्ड निर्यात से यह स्पष्ट है कि भारत अब केवल एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक मैन्युफैक्चरिंग लीडर बन रहा है।
‘मेक इन इंडिया’ अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक वास्तविक सफलता कहानी है — और Apple इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है।
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