“सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी: लद्दाख हिंसा, NGO लाइसेंस रद्दीकरण और राज्यhood आंदोलन की सच्चाई”

“लद्दाख में 2025 की हिंसक उठापटक में सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी, SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द होना, 35 दिन की भूख हड़ताल और क्षेत्रीय राजनीतिक संघर्ष — जानिए पूरी कहानी।”

सोनम वांगचुक

लद्दाख, हिमालय की ऊँची और निर्जन भूमि, इन दिनों देश के राजनीतिक भूचाल का केन्द्र बना हुआ है। 2025 में यहाँ जो हिंसा और विरोध-प्रदर्शन हुए, उनमें मुख्य भूमिका रही सोनम वांगचुक की — जिनकी गिरफ्तारी, उनके NGO के FCRA लाइसेंस रद्द होना और 35 दिन की भूख हड़ताल की कहानी अभी पूरे देश को झकझोर रही है। इस आर्टिकल में हम प्रत्येक कड़ी को विस्तार से देखेंगे।


1. आंदोलन की जड़ें: लद्दाख का दिल और मांगें

पिछले इतिहास और असंतोष

  • 2019 में जम्मू-काश्मीर के विशेष दर्जे (Article 370) को समाप्त करने और कश्मीर विभाजन के बाद लद्दाख को सीधा केंद्र शासित क्षेत्र (Union Territory) घोषित किया गया था। इस फैसले के बाद लद्दाख को विधान सभा नहीं मिली और स्थानीय लोगों को शासन व विकास की दिशा तय करने का अधिकार सीमित हो गया।

  • स्थानीय लोग समय से यह मांग करते रहे हैं कि लद्दाख को राज्य (Statehood) मिले या कम से कम संविधान के Sixth Schedule में जगह मिले, ताकि जनजातीय, भूमि और संसाधन अधिकार सुरक्षित हो सकें।

  • प्रशासनिक असंतोष, नौकरियों व संसाधन वितरण में तंत्रहीनता, स्थानीय आवाज़ न सुनना — ये सब तनाव की वजह बन रहे थे।

सोनम वांगचुक की भूमिका

  • सोनम वांगचुक, जिन्हें “इनोवेटर”, “शिक्षा सुधारक” और “क्लाइमेट एक्टिविस्ट” के रूप में जाना जाता है, लंबे समय से लद्दाख के सामाजिक, पर्यावरणीय और शैक्षिक मुद्दों पर आवाज़ उठाते आ रहे हैं।

  • उनका NGO SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) लद्दाख के गांवों में शिक्षा सुधार, संस्कृति संरक्षण और स्वावलंबन के प्रोजेक्ट्स चलाता रहा है।

  • इस बार उन्होंने आंदोलन को नई ऊँचाई दी — 10 सितंबर 2025 को उन्होंने 35 दिन की भूख हड़ताल की शुरुआत कर दी। वे चाहते थे कि केंद्र सरकार उनकी मांगों को सुने और कार्रवाई करे।


2. भूख हड़ताल, संघर्ष और टकराव

भूख हड़ताल की शुरुआत और प्रभाव

  • 10 सितंबर 2025 को वांगचुक ने घोषणा की कि वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे, जिसमें वे लद्दाख को राज्य का दर्जा + Sixth Schedule की संरक्षण की मांग लेकर बैठे।

  • उनका कहना था कि यह कड़ा कदम इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वार्ता और मांगें अनसुनी होती जा रही थीं।

  • इस दौरान, प्रशासन ने उनसे और आंदोलन से जुड़े संगठनों पर कई जांचों की खबरें शुरू कीं।

आंदोलन का चरम — अस्पताल जाने वाले

  • भूख हड़ताल के 35 दिनों के अंदर, कुछ साथी भूख स्ट्राइकरों की तबीयत बिगड़ी और वे अस्पताल ले जाए गए। इसे देखते हुए वांगचुक ने हड़ताल समाप्त करने का ऐलान किया।

  • इसके बाद लद्दाख में जश्न और विरोध-प्रदर्शन फैल गए — युवा और स्थानीय समुदाय एकजुट हो गए।


3. 24–25 सितंबर की हिंसा: शांतिपूर्ण प्रदर्शन से संघर्ष तक

 कैसे शांति से विद्रोह तक पहुँचा आंदोलन?

  • 24 सितंबर 2025 को शटडाउन की घोषणा हुई — सरकारी तथा राजनीतिक कार्यालय बंद रहे।

  • शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन देर रात तक हिंसा में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी वाहनों, पुलिस वाहनों पर हमला किया, भाजपा कार्यालय को आग लगाने की कोशिश की।

  • पुलिस ने अश्रु गैस, लाठियाँ और गोलीबारी का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश की। परिणामस्वरूप 4 लोगों की मृत्यु, कई घायल और सुरक्षा बलों को भी चोटें आईं। प्रशासन ने तुरंत कर्फ्यू और सार्वजनिक सभा रोकने वाले आदेश जारी कर दिए।

 गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया

  • गृह मंत्रालय (MHA) ने शक्तिशाली बयान जारी किया कि वांगचुक की “provocative speeches” ने हिंसा को बढ़ावा दिया। उन्होंने विदेशी आंदोलन, अरब स्प्रिंग आदि प्रकरणों का हवाला देकर हालांकि आरोप लगाया कि वांगचुक बड़े पैमाने पर बेवजह आंदोलन को उकसा रहे थे।

  • बताया गया कि वह आंदोलन के पीछे “नियोजित” और “राजनीतिक एजेंडे” के तहत काम कर रहे हैं।


4. SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्दीकरण: वजहें और विवाद

 क्या है FCRA और इसका महत्व?

  • FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) वह कानून है जो यह नियंत्रित करता है कि NGO को विदेश से दान मिल सके या न मिल सके। FCRA लाइसेंस न होने पर NGO विदेशी फंडिंग नहीं ले सकती।

  • भारत सरकार पिछले कई वर्षों से NGO पर निगरानी बढ़ा रही है और नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द कर देती है।

 SECMOL पर आरोप और रद्दीकरण

  • 25 सितंबर को गृह मंत्रालय ने SECMOL का FCRA लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया।

  • मंत्रालय ने आरोप लगाया कि SECMOL ने Section 17 और Section 18 के उल्लंघन किए हैं — जैसे कि विदेशी धन को नकद जमा करना, धन के स्रोत छुपाना आदि।

  • उदाहरण के लिए, 3,35,000 रुपये का दान SECMOL ने बताया कि वह एक पुरानी बस की बिक्री की राशि थी, लेकिन उसने उसे FCRA खाते में जमा नहीं किया।

  • अन्य आरोपों में संस्थान की बैंक खाते रिपोर्टिंग छुपाना, विदेशी धन को निजी कंपनियों या संबद्ध संस्थाओं को भेजने का मामला शामिल है।

  • सरकार ने “Show Cause Notice (SCN)” जारी किया था 20 अगस्त 2025 को कि क्यों उस NGO का रजिस्ट्रेशन रद्द न किया जाए। SECMOL ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

आलोचना और रक्षा

  • सोनम वांगचुक ने कहा कि यह कार्रवाई “scapegoat tactic” है — असली समस्या छिपाने के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

  • उन्होंने कहा कि उनकी संस्थाएँ पारदर्शी हैं और वे विदेशी फंडिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहते।

  • वहीं, आलोचक और सरकार कह रहे हैं कि यह कदम समयनिष्ठ और न्यायोचित है, क्योंकि आंदोलन की दिशा और वित्तीय गतिविधियों में मिलावट दिखती है।


5. गिरफ्तारी और गिरफ्तारी के आरोप

 गिरफ्तारी का वक्त और तरीका

  • 26 सितंबर 2025 को, हिंसा के 2 दिन बाद, पुलिस ने सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया।

  • यह गिरफ्तारी NSA (National Security Act) के तहत हुई — एक कठोर कानून जो राष्ट्रीय सुरक्षा को आधार बनाकर नेटॉतिक कार्रवाई की अनुमति देता है।

  • गिरफ्तारी से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना थी, लेकिन उसे ही रोक दिया गया।

आरोप क्या हैं?

  • सरकार का कहना है कि सोनम वांगचुक की “provocative speeches” ने mob violence को उकसाया और लोगों की जानों को खतरा पहुंचाया।

  • उनके खिलाफ कथित असामाजिक गतिविधियों, विदेशी फंडिंग में अनियमितता और देशद्रोही तत्वों की साजिश जोड़ने की बात भी कही जा रही है।

 उनकी प्रतिक्रिया

  • सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें “बेइमाना आरोपों” में फँसाया जा रहा है ताकि शासन की असफलता और लोगों के लंबे समय से झेलते असंतोष पर धूल फेंकी जाए।

  • उन्होंने कैंडिड अंदाज में कहा कि उनका आंदोलन न्यायोचित और शांतिपूर्ण था, लेकिन जब आवाज़ दबाई जाए तो संघर्ष जन्म ले लेता है।


6. वर्तमान स्थिति और आगे की चुनौतियाँ

⚖️ सुरक्षा, एफआईआर और कार्रवाई

  • कई लोगों को धरदबोरा कर हिरासत में लिया गया।

  • राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्षी दल व सोशल एक्टिविस्ट वांगचुक की गिरफ्तारी को लोकतंत्र पर हमला कह रहे हैं।

  • CBI ने SECMOL और वांगचुक से जुड़े संस्थानों की वित्तीय गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।

  • प्रशासन ने सोनम वांगचुकद्वारा संचालित अन्य संस्था “HIAL (Himalayan Institute of Alternative Learning)” को मिली ज़मीन आवंटन रद्द कर दी है।

राजनीतिक और सामाजिक असर

  • लड़ाख आंदोलन अब राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है और इसे केंद्र व राज्यों की राजनीति में नए विवर्तन बिंदु के रूप में देखा जा रहा है।

  • यदि सोनम वांगचुक को बर्दाश्त कर लिया गया, तो भविष्य में और अधिक तेज़ प्रदर्शन हो सकते हैं — युवा शक्ति झल्ला सकती है।

  • केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच संवाद और विश्वास की कमी इन संघर्षों को और भड़का सकती है।

  • यदि न्यायालयों में यह मामला पहुंचे तो FCRA नियम, मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे बड़े विषय सामने आएँगे।


निष्कर्ष: क्या यह संघर्ष सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई है?

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी केवल एक घटना नहीं है — यह उस दीपक को बुझाने की कोशिश है, जिसने लद्दाख में लंबे समय से जलते सवालों को उजागर किया। ज़मीन, संसाधन, सांस्कृतिक पहचान, और संविधानिक संरक्षा — ये सभी मुद्दे पीछे छूटे नहीं हैं।

हालाँकि हिंसा कभी भी समाधान नहीं होती, पर इस घटना ने यह स्पष्ट किया कि जिस तरह की उपेक्षा और असमानता लोगों में दबाव जमा रही थी, वह अब फूटने लगी थी। अब न केवल लद्दाख की राजनीति, बल्कि पूरे भारत में यह सवाल उठ रहा है — जब आवाज़ दबाई जाए, तो कैसे शांतिपूर्ण आंदोलन सुरक्षित रह सकता है?

News Heaven” ब्लॉग पाठकों से अपील करेगा कि इस विवाद को केवल एक दर्शक की तरह न देखें, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक दृष्टि से समझने का प्रयास करें — क्योंकि यह लड़ाई केवल लद्दाख की नहीं, भारत की लोकतांत्रिक आत्मा की है।

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