भारतीय रुपया 13 अक्टूबर 2025 को शुरुआती कारोबार में 5 पैसे गिरकर ₹83.30 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती से रुपया दबाव में है। जानिए आरबीआई की रणनीति और विशेषज्ञों का क्या कहना है।

💱 डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर — जानिए वजहें
भारतीय रुपया 13 अक्टूबर 2025 को शुरुआती कारोबार में 5 पैसे गिरकर ₹83.30 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव डाला है, जिनमें भारत भी शामिल है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी का कारण विदेशी पूंजी का बहिर्वाह (foreign fund outflows) और आयातकों की डॉलर की बढ़ती मांग भी है।
🌍 वैश्विक बाजार की परिस्थितियाँ
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बना हुआ है, क्योंकि निवेशक इस समय सुरक्षित निवेश (safe-haven assets) की ओर झुक रहे हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी की आशंकाओं ने डॉलर को और मजबूत किया है।
दूसरी ओर, कच्चे तेल की ऊँची कीमतों ने भारत के आयात बिल को बढ़ाया है। चूंकि भारत दुनिया का एक बड़ा तेल आयातक है, तेल के महंगे होने से करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) बढ़ता है, जिससे रुपया और कमजोर होता है।
🏦 RBI की भूमिका — स्थिरता बनाए रखने की कोशिश
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये में तेज़ उतार-चढ़ाव रोकने के लिए निगरानी और हस्तक्षेप कर रहा है।
हालाँकि, विश्लेषकों का मानना है कि मुद्रास्फीति नियंत्रण और मुद्रा स्थिरता के बीच संतुलन बनाना आरबीआई के लिए चुनौतीपूर्ण है।
फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि आरबीआई रुपये को ₹83.35–₹83.40 के रेज़िस्टेंस जोन के ऊपर जाने से रोकने के लिए रणनीतिक कदम उठाता रहेगा।
📊 विशेषज्ञों की राय — आगे क्या होगा?
मुद्रा विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले समय में रुपये की चाल इस पर निर्भर करेगी कि
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अंतरराष्ट्रीय जोखिम भावना (global risk sentiment) कैसी रहती है,
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की नीतियाँ क्या होती हैं,
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और विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारत में दिलचस्पी कैसी रहती है।
अनुज गुप्ता, हेड ऑफ कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च के अनुसार,
“जब तक डॉलर इंडेक्स मजबूत रहेगा, रुपये पर दबाव बना रहेगा।”
अन्य विश्लेषकों का अनुमान है कि रुपये की ट्रेडिंग रेंज फिलहाल ₹83.20 से ₹83.45 के बीच रह सकती है।
🔍 निष्कर्ष: आने वाले हफ्तों में क्या रहेगा रुख
रुपये की 5 पैसे की गिरावट मामूली लग सकती है, लेकिन यह वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का संकेत देती है।
कच्चे तेल की ऊँची कीमतें, डॉलर की मजबूती, और विदेशी पूंजी की अस्थिरता रुपये को कमजोर कर रही हैं।
आरबीआई की नीतियाँ और अमेरिकी फेड के अगले निर्णय यह तय करेंगे कि रुपया स्थिर रहेगा या और गिरेगा।
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