भारत के मशहूर ऐड गुरु और पद्मश्री सम्मानित पियूष पांडे का 70 वर्ष की आयु में निधन। उन्होंने फेविकोल, कैडबरी और “अबकी बार मोदी सरकार” जैसे यादगार कैंपेन से भारतीय विज्ञापन को नई पहचान दी।

मुंबई, 24 अक्टूबर 2025 — भारतीय विज्ञापन जगत ने अपने सबसे बड़े रचनात्मक चेहरे को खो दिया है। पियूष पांडे, जिन्होंने भारत के सबसे प्रसिद्ध और भावनात्मक विज्ञापन अभियानों को जन्म दिया, अब हमारे बीच नहीं रहे। 70 वर्ष की आयु में मुंबई में उनका निधन हो गया। उनके जाने से पूरा विज्ञापन जगत, ब्रांड जगत और रचनात्मक समुदाय शोक में डूब गया है।
भारत में विज्ञापन की दिशा बदलने वाला सफर
1955 में जयपुर, राजस्थान में जन्मे पियूष पांडे ने 1982 में ओगिल्वी एंड मेथर (अब Ogilvy India) के साथ अपने करियर की शुरुआत की। अगले चार दशकों में उन्होंने भारतीय उपभोक्ताओं से जुड़ने का तरीका बदल दिया — सरल भाषा, हास्य और भारतीय संस्कृति की गहराई के साथ।
उनके यादगार अभियानों में शामिल हैं:
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फेविकोल का “जोड़ टूटेगा नहीं” विज्ञापन
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कैडबरी का “कुछ खास है ज़िंदगी में” अभियान
इन अभियानों ने न केवल उत्पादों को लोकप्रिय बनाया, बल्कि भावनाओं के ज़रिए ब्रांड्स को लोगों के दिलों तक पहुंचाया।
ओगिल्वी इंडिया के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन और ग्लोबल चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के रूप में, उन्होंने भारतीय विज्ञापन को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया।
भारत की यादगार टैगलाइन के जनक
पियूष पांडे द्वारा रचे गए कई स्लोगन आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।
उनकी सबसे प्रसिद्ध राजनीतिक टैगलाइन “अबकी बार मोदी सरकार” ने 2014 के आम चुनावों की तस्वीर बदल दी।
इसके अलावा उन्होंने एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, रेमंड, और वोडाफोन जैसे ब्रांड्स के लिए भी कालजयी कैंपेन तैयार किए।
उनका सरल लेकिन गहरा मंत्र था —
“लोगों की भाषा में बात करो — उनके साथ, न कि उन पर।”
पुरस्कार और वैश्विक पहचान
2016 में पियूष पांडे को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
वे इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा चुने गए पहले एशियाई थे जिन्हें “Most Influential Creative Person” का खिताब मिला।
उनके नेतृत्व में ओगिल्वी इंडिया ने कई Cannes Lions Awards जीते और भारतीय रचनात्मकता को विश्वस्तर पर पहचान दिलाई।
श्रद्धांजलियाँ और प्रतिक्रियाएँ
उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर देशभर से शोक संदेश आने लगे।
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने उन्हें “जीवन के लिए अथाह उत्साह रखने वाले व्यक्ति” बताया।
वहीं सैकड़ों सहयोगियों ने उन्हें “मेंटॉर, स्टोरीटेलर और दोस्त” कहा।
एक विरासत जो हमेशा जिंदा रहेगी
पियूष पांडे का प्रभाव केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं था।
उन्होंने यह साबित किया कि भावनाएँ, सादगी और संस्कृति ही किसी भी ब्रांड को दिल से जोड़ती हैं।
उनकी सोच आज भी नई पीढ़ी के क्रिएटिव्स, कॉपीराइटर्स और स्टोरीटेलर्स को प्रेरित करती है।
भारत इस रचनात्मक जीनियस को याद करता रहेगा, क्योंकि ऐसे पियूष पांडे दोबारा नहीं आते।
🕊️ News Heaven से श्रद्धांजलि:
News Heaven में हम पियूष पांडे को केवल एक विज्ञापन गुरु के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे कलाकार के रूप में याद करते हैं जिन्होंने भारत को सपने देखना, मुस्कुराना और जुड़ना सिखाया। उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
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