भारत में दीवाली 2025 से पहले चांदी की भारी कमी, आयात में गिरावट और बढ़ती मांग से कीमतें आसमान छू रही हैं। जानिए पूरा कारण।

✨ दीवाली से पहले भारत में चांदी की कमी: बढ़ती कीमतों के पीछे क्या है कारण?
भारत में दीवाली 2025 के आगमन से पहले चांदी की भारी कमी देखी जा रही है। यह स्थिति व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
जो धातु पहले सुलभ और सस्ती मानी जाती थी, अब वैश्विक कीमतों से लगभग 10% अधिक दरों पर बिक रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, 2025 के पहले आठ महीनों में भारत के चांदी आयात में 40% से अधिक की गिरावट आई है। त्योहारी मांग बढ़ने के समय यह कमी चांदी के सिक्कों, आभूषणों और बर्तनों की कीमतों को और बढ़ा रही है।
💰 भारत में चांदी की कमी के मुख्य कारण
1. आयात में भारी गिरावट
भारत अपनी लगभग 80% चांदी का आयात ब्रिटेन, हांगकांग और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से करता है। 2025 में आयात में करीब 42% की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक व्यापार में मंदी, शिपिंग देरी और ऊँचे आयात शुल्क ने समस्या को और बढ़ा दिया है।
2. वैश्विक खनन में गिरावट
सोने के विपरीत, चांदी का उत्पादन मुख्य रूप से तांबा, जस्ता और सीसा जैसी धातुओं के खनन के उपउत्पाद के रूप में होता है। जब इन धातुओं का उत्पादन घटता है, तो चांदी की आपूर्ति भी कम हो जाती है, जिससे वैश्विक स्तर पर उपलब्धता सीमित हो जाती है।
3. औद्योगिक मांग में जबरदस्त उछाल
आभूषणों के अलावा, चांदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर पैनलों में बढ़ रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और तकनीकी उद्योगों के विस्तार से औद्योगिक मांग इतिहास के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी है।
4. निवेशकों की होड़ और ETF की चालें
चांदी ने हाल के वर्षों में मजबूत रिटर्न दिया है, जिससे निवेशकों का आकर्षण बढ़ा है। लेकिन कई सिल्वर ETF ने अपनी खरीदारी घटा दी है, जिससे बाजार में तरलता कम हुई है। वहीं, भारतीय निवेशक भौतिक चांदी की खरीद में तेजी दिखा रहे हैं — जिससे आपूर्ति पर और दबाव बढ़ा है।
🪔 दीवाली की मांग ने बढ़ाई खरीदारी की होड़
दीवाली को धन और समृद्धि का त्योहार माना जाता है, और इस दौरान सोना-चांदी की खरीद शुभ मानी जाती है।
इस साल, मुंबई, जयपुर और दिल्ली जैसे शहरों के ज्वैलर्स का कहना है कि चांदी का स्टॉक बेहद सीमित है और ऑर्डर प्रीमियम कीमतों पर पूरे किए जा रहे हैं।
कई थोक विक्रेताओं ने चेतावनी दी है कि नए शिपमेंट आने तक थोक बिक्री अस्थायी रूप से रुक सकती है। उपभोक्ता पहले से ही बढ़ी हुई कीमतों और मेकिंग चार्जेज़ का असर महसूस कर रहे हैं — कुछ उत्पादों के दाम 10–12% अधिक हो गए हैं।
📈 कीमतों और बाजार का रुझान
विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारी सीजन के दौरान चांदी की कीमतें ऊँचाई पर बनी रहेंगी, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति सीमित है और भारत की मांग लगातार बढ़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चांदी औद्योगिक और निवेश मांग के कारण मजबूती से बिक रही है।
रुपये की अस्थिरता और आयात शुल्क की नीतियां आने वाले महीनों में कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि आयात सामान्य नहीं हुआ, तो 2026 की शुरुआत तक चांदी नई ऊँचाइयाँ छू सकती है।
👥 खरीदारों और निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
सामान्य उपभोक्ताओं के लिए संदेश स्पष्ट है — चांदी उपलब्ध है, लेकिन सस्ती नहीं।
दीवाली से पहले खरीदारी करने वालों को जल्द खरीदने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि त्योहार नज़दीक आते ही कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
निवेशकों के लिए, विशेषज्ञ लंबी अवधि का दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देते हैं।
चांदी औद्योगिक उपयोग, सीमित उत्पादन और भारत-चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की निरंतर मांग के कारण एक मजबूत निवेश विकल्प बनी हुई है।
✨ निष्कर्ष: चमकती धातु, घटती आपूर्ति
भारत में दीवाली 2025 से पहले चांदी की कमी यह दिखाती है कि कैसे वैश्विक उत्पादन, औद्योगिक मांग और स्थानीय परंपराएँ एक साथ आकर बाजार को प्रभावित कर सकती हैं।
त्योहार भले ही खुशियाँ और समृद्धि लाए, लेकिन चांदी के बाजार में कहानी कुछ और है — ऊँची मांग, सीमित आपूर्ति और बढ़ती कीमतें।
जो भी खरीदारी करने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह समय है कि वे जल्द फैसला लें — क्योंकि इस बार चांदी की चमक महंगी पड़ सकती है।
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