ग्रीन पटाखे बनाम पारंपरिक पटाखे: इस दिवाली कौन है पर्यावरण का सच्चा रक्षक?

जानिए ग्रीन पटाखे और पारंपरिक पटाखों में असली अंतर। समझिए कैसे पर्यावरण-अनुकूल पटाखे प्रदूषण को कम करते हैं और क्या वे सच में हमारे पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प हैं इस दिवाली।

ग्रीन पटाखे

🌍 परिचय (Introduction)

हर साल दिवाली आते ही एक बहस फिर से शुरू होती है — क्या हमें पटाखे फोड़ने चाहिए या नहीं? पारंपरिक पटाखे जहां खुशी और रोशनी का प्रतीक हैं, वहीं वे हमारे आसमान में धुएं और ज़हरीली गैसों का बादल छोड़ जाते हैं। हाल के वर्षों में “ग्रीन पटाखे” एक पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में सामने आए हैं, जो कम प्रदूषण और सुरक्षित जश्न का वादा करते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि — क्या ये वास्तव में पर्यावरण के लिए बेहतर हैं? आइए जानें विस्तार से।


🎇 पारंपरिक पटाखे क्या होते हैं?

पारंपरिक पटाखों में रसायनों का मिश्रण होता है जैसे सल्फर, पोटेशियम नाइट्रेट, बेरियम, एल्युमिनियम और एंटिमोनी सल्फाइड। ये जलने पर चमकदार रोशनी और तेज आवाज़ तो पैदा करते हैं, लेकिन साथ ही छोड़ते हैं कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और PM2.5 व PM10 जैसे प्रदूषक कण।


⚠️ पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव


💚 ग्रीन पटाखे क्या हैं?

ग्रीन पटाखे सीएसआईआर-नीरी (CSIR-NEERI) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किए गए हैं। इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये 30–40% कम प्रदूषण फैलाएं और हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल न करें।


🧪 ग्रीन पटाखों की मुख्य विशेषताएं


🌱 ग्रीन पटाखों के प्रकार

इनका उद्देश्य है — धुएं को कम करना, प्रदूषक गैसों को घटाना और लोगों को एक सुरक्षित विकल्प देना।


⚖️ ग्रीन पटाखे बनाम पारंपरिक पटाखे — अंतर की तालिका

विशेषता पारंपरिक पटाखे ग्रीन पटाखे
मुख्य रसायन सल्फर, बेरियम, एल्युमिनियम कम प्रदूषण वाले विकल्प, बेरियम रहित
वायु प्रदूषण बहुत अधिक 30–40% कम
ध्वनि स्तर 125 डेसिबल तक 110 डेसिबल से कम
स्वास्थ्य जोखिम गंभीर सीमित
प्रमाणन नहीं CSIR-NEERI QR कोड
कीमत सस्ती थोड़ी महंगी
उपलब्धता हर जगह सीमित लेकिन बढ़ती हुई

🔬 क्या ग्रीन पटाखे पूरी तरह सुरक्षित हैं?

हालांकि ग्रीन पटाखे प्रदूषण कम करते हैं, लेकिन ये पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं हैं
इनसे भी थोड़ी मात्रा में धुआँ और कार्बन कण निकलते हैं। साथ ही, कई स्थानीय निर्माता नकली “ग्रीन” पटाखे बेच देते हैं, जिनसे खतरा बरकरार रहता है।
इसलिए, सिर्फ प्रमाणित NEERI QR कोड वाले पटाखे ही खरीदें।


🎆 सरकारी नियम और न्यायालय के आदेश

भारत के सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कई बार पारंपरिक पटाखों पर नियंत्रण के आदेश दिए हैं।
कई राज्यों में अब केवल ग्रीन पटाखों को ही बेचने या फोड़ने की अनुमति है।
यह कदम सतत और स्वच्छ दिवाली की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।


🌟 आगे का रास्ता: ज़िम्मेदारी से मनाएं दिवाली

सिर्फ ग्रीन पटाखों तक सीमित रहना ही समाधान नहीं है। हमें शोर और धुएं से मुक्त दिवाली का लक्ष्य रखना चाहिए।
आप कर सकते हैं:


💬 निष्कर्ष (Conclusion)

ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में बेहतर हैं, लेकिन वे अंतिम समाधान नहीं हैं।
यदि हम सच में एक स्वच्छ और स्वस्थ दिवाली चाहते हैं, तो हमें जिम्मेदारी के साथ जश्न मनाना होगा

✨ इस दिवाली, एक वादा करें — खुशियाँ जलाएं, वातावरण नहीं!

Also read: दिवाली 2025 कब है? 20 या 21 अक्टूबर? जानिए सही तारीख, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और महत्व यहां!

Exit mobile version