क्या सच में Brain Rot दिमाग को नुकसान पहुंचाता है? जानिए डॉक्टरों से कि mindless scrolling और सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल याददाश्त, फोकस और मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है।

परिचय (Introduction)
आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सुबह आंख खुलते ही मोबाइल उठाना और रात को सोने से पहले तक रील्स, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया फीड्स स्क्रॉल करना अब आम आदत बन गई है।
इसी बीच एक शब्द तेजी से चर्चा में आया है — “ब्रेन रॉट (Brain Rot)”। लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या जरूरत से ज्यादा मोबाइल और सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से हमारा दिमाग सच में कमजोर हो रहा है?
डॉक्टर और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब इस पर खुलकर बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि जरूरत से ज्यादा mindless scrolling यानी बिना किसी उद्देश्य के स्क्रॉल करना, दिमागी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। आइए जानते हैं कि इस पर डॉक्टर और विज्ञान क्या कहते हैं।
“Brain Rot” का मतलब क्या है?
“Brain Rot” कोई मेडिकल बीमारी नहीं है, लेकिन यह शब्द उस स्थिति को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जब व्यक्ति लगातार डिजिटल कंटेंट देखने के कारण:
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मानसिक थकान महसूस करता है
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ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है
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याददाश्त कमजोर लगने लगती है
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किसी काम में मन नहीं लगता
यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा देखी जा रही है जो घंटों तक कम गुणवत्ता वाला, बार-बार दोहराया जाने वाला कंटेंट देखते रहते हैं। युवा और किशोर वर्ग इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है।
डॉक्टरों की राय: क्या Mindless Scrolling दिमाग को नुकसान पहुंचाती है?
डॉक्टरों के अनुसार, भले ही “ब्रेन रॉट” कोई बीमारी नहीं है, लेकिन इसके लक्षण पूरी तरह असली हैं। दिमाग को स्वस्थ रहने के लिए चुनौतीपूर्ण और सार्थक गतिविधियों की जरूरत होती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति रोजाना 2 घंटे से ज्यादा समय बिना सोचे-समझे सोशल मीडिया स्क्रॉल करता है, तो इससे दिमाग के वे हिस्से प्रभावित हो सकते हैं जो:
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याददाश्त
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ध्यान (Focus)
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निर्णय लेने की क्षमता
से जुड़े होते हैं। समय के साथ व्यक्ति को एकाग्रता में कमी, सोचने की गति धीमी और काम करने की क्षमता में गिरावट महसूस हो सकती है।
हालांकि डॉक्टर यह भी साफ करते हैं कि अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि सोशल मीडिया दिमाग की कोशिकाओं को स्थायी रूप से नष्ट कर देता है। लेकिन यह दिमाग की कार्यक्षमता को जरूर प्रभावित करता है।
Mindless Scrolling मानसिक प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करती है?
1. डोपामिन का ज्यादा असर
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि हर लाइक, कमेंट और वीडियो देखने पर दिमाग में डोपामिन रिलीज हो। यह हमें बार-बार स्क्रॉल करने के लिए प्रेरित करता है। धीरे-धीरे दिमाग गहरी और उपयोगी चीजों में रुचि लेना कम कर देता है।
2. ध्यान देने की क्षमता कम होना
छोटे-छोटे वीडियो और फटाफट बदलता कंटेंट दिमाग को तुरंत मनोरंजन का आदी बना देता है। इसका नतीजा यह होता है कि पढ़ाई, काम या किताब पढ़ने जैसे लंबे कार्यों में ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है।
3. मानसिक थकान
लगातार तेज और अनियमित कंटेंट देखने से दिमाग पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे मानसिक थकावट, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
क्या Brain Rot हमेशा के लिए रहता है?
अच्छी खबर यह है कि ब्रेन रॉट स्थायी नहीं होता। डॉक्टर बताते हैं कि दिमाग में न्यूरोप्लास्टिसिटी होती है, यानी वह खुद को फिर से बेहतर बना सकता है।
अगर व्यक्ति:
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स्क्रीन टाइम कम करे
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मोबाइल का सीमित और समझदारी से उपयोग करे
तो ध्यान, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता धीरे-धीरे वापस आ सकती है।
Mindless Scrolling से दिमाग को कैसे बचाएं?
विशेषज्ञ कुछ आसान उपाय सुझाते हैं:
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स्क्रीन टाइम सीमित करें – सोशल मीडिया ऐप्स पर समय सीमा तय करें
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Mindful Scrolling करें – ज्ञानवर्धक और उपयोगी कंटेंट देखें
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डिजिटल ब्रेक लें – सुबह उठते ही और सोने से पहले फोन से दूरी रखें
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शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं – व्यायाम दिमाग के लिए फायदेमंद है
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पर्याप्त नींद लें – अच्छी नींद याददाश्त और फोकस को बेहतर बनाती है
निष्कर्ष (Conclusion)
तो क्या ब्रेन रॉट सच है? भले ही यह कोई मेडिकल बीमारी न हो, लेकिन mindless scrolling का दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह वास्तविक है। डॉक्टरों की राय साफ है — संतुलन और जागरूकता बेहद जरूरी है।
अगर हम सोशल मीडिया का सही और सीमित इस्तेमाल करें, तो हम अपने दिमाग को तेज, स्वस्थ और सक्रिय रख सकते हैं।
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