राजस्थान में Kaison Pharma की कफ सिरप पर बैन | Dextromethorphan की गुणवत्ता पर सवाल

राजस्थान सरकार ने Kaison Pharma की कफ सिरप पर गुणवत्ता जांच में असफल होने के बाद बैन लगाया। जानिए Dextromethorphan क्या है और क्यों है चर्चा में।

Kaison Pharma

🗞️ राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने Kaison Pharma की कफ सिरप पर लगाई रोक – गुणवत्ता जांच में नाकाम रही दवाएं

राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग ने Kaison Pharma कंपनी की कफ सिरप सहित कुल 19 दवाओं पर बैन लगा दिया है।
इन दवाओं में Dextromethorphan नामक तत्व शामिल है, जो आमतौर पर सूखी खांसी में इस्तेमाल किया जाता है।

यह बड़ा कदम तब उठाया गया जब प्रयोगशाला जांच (Lab Test) में कई सैंपल्स मानक गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरे
इस फैसले ने भारत की फार्मा इंडस्ट्री में दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण पर गहन बहस छेड़ दी है।


⚕️ बैन क्यों लगाया गया?

रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने 10,000 से अधिक दवाओं के सैंपल्स अलग-अलग बाजारों और मेडिकल स्टोर्स से लिए।
जांच में पाया गया कि 42 सैंपल्स “गैर-मानक” (Non-Standard) हैं।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत आदेश जारी करते हुए Kaison Pharma के सभी उत्पादों की बिक्री और वितरण रोक दिया।
साथ ही, राज्य औषध नियंत्रक (State Drug Controller) राजाराम शर्मा को निलंबित (Suspended) कर दिया गया है, ताकि जांच निष्पक्ष रूप से की जा सके।


💊 क्या है Dextromethorphan और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

Dextromethorphan (DXM) एक आम कफ सिरप में पाया जाने वाला तत्व है जो सूखी खांसी को नियंत्रित करने में मदद करता है।
यह दवा सामान्य रूप से सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन इसके निर्माण में थोड़ी भी गलती गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खराब गुणवत्ता वाली या मिलावटी कफ सिरप से बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए खतरनाक दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
भारत के स्वास्थ्य विभाग ने पहले भी सलाह दी थी कि 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को Dextromethorphan नहीं देना चाहिए।


⚠️ राज्य सरकार का रुख (State Government’s Stand)

राजस्थान सरकार ने सभी अस्पतालों, दवा दुकानों और वितरकों को आदेश दिया है कि वे Kaison Pharma की सभी दवाओं की बिक्री तुरंत बंद करें।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह एक एहतियाती कदम (Precautionary Measure) है, जब तक कि जांच पूरी नहीं हो जाती।

विभाग ने कहा है कि खांसी और श्वसन रोगों के मरीजों को वैकल्पिक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
साथ ही डॉक्टरों को सलाह दी गई है कि वे सामान्य खांसी के मामलों में Dextromethorphan आधारित सिरप न दें।


🧬 राज्य औषध नियंत्रक का निलंबन (Suspension of Drug Controller)

जांच के दौरान एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य औषध नियंत्रक राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, उनके कार्यालय में दवा अनुमोदन और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया में गड़बड़ी और लापरवाही की जांच की जा रही है।

यह कदम दिखाता है कि सरकार दवा सुरक्षा के मुद्दे को लेकर गंभीर और सख्त रुख अपनाए हुए है।


🌍 भारत की फार्मा इंडस्ट्री पर असर (Impact on India’s Pharma Sector)

भारत को विश्व स्तर पर “Pharmacy of the World” कहा जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर कई विवाद सामने आए हैं।
गाम्बिया (Gambia) और उज़्बेकिस्तान (Uzbekistan) में भारतीय सिरप से जुड़ी घटनाओं के बाद, भारत की फार्मा कंपनियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है।

राजस्थान सरकार का यह कदम संकेत देता है कि अब गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की दवा उद्योग में पारदर्शिता और सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


🩺 मरीजों और दवा दुकानों पर असर (Impact on Patients and Pharmacies)

बैन लगते ही राजस्थान में दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर असर पड़ा है।
दवा विक्रेता (Pharmacists) अपने स्टॉक की जांच कर रहे हैं और बैन की गई सिरप्स को हटाया जा रहा है।
मरीजों को सलाह दी गई है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के अपनी दवा न बदलें।


🧠 विशेषज्ञों की राय (Expert Opinion)

जयपुर की फार्माकोलॉजिस्ट डॉ. शर्मा कहती हैं:

“यह बैन बहुत जरूरी था। सरकार का यह कदम जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
इस घटना से साफ है कि फार्मा कंपनियों में गुणवत्ता जांच और निगरानी की प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है।”


🔍 अब आगे क्या? (What Happens Next)

राजस्थान दवा नियंत्रण प्रशासन (Drug Control Administration) अब अपनी रिपोर्ट केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को भेजेगा।
यदि जांच में समान खामियाँ अन्य राज्यों में भी पाई गईं, तो यह बैन राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू किया जा सकता है।

यदि Kaison Pharma पर आरोप सिद्ध होते हैं, तो कंपनी पर लाइसेंस रद्दीकरण, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है —
Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत।


🏁 निष्कर्ष (Conclusion)

Kaison Pharma की कफ सिरप पर राजस्थान सरकार का बैन राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है।
यह घटना निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों के लिए एक चेतावनी (Wake-Up Call) है कि दवा की गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

जांच जारी है और जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे सरकार और फार्मा कंपनियाँ इस मामले से क्या सीखती हैं।

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