नेपाल की राजनीति में भूचाल! Gen Z युवाओं और वकीलों ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुषिला कार्की को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाया। जानिए उनकी यात्रा, चुनौतियाँ और नेपाल के भविष्य पर असर।

Nepal Gen Z Protest: सुषिला कार्की प्रधानमंत्री की दौड़ में
नेपाल की राजनीति इस वक्त गरमाई हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अब नया चेहरा खोजा जा रहा है। इसी बीच Gen Z युवाओं और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने मिलकर जिस नाम को सामने रखा है, वो है – पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुषिला कार्की।
अगर कार्की प्रधानमंत्री बनती हैं तो ये नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा।
क्यों सुषिला कार्की का नाम चर्चा में है?
- आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं Gen Z युवा ग्रुप्स, जो साफ-सुथरी राजनीति की माँग कर रहे हैं।
- सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी उनका समर्थन किया है।
- लोग उन्हें ईमानदारी और न्याय की प्रतीक मानते हैं – जो पारंपरिक नेताओं से बिल्कुल अलग है।
पीएम बनने की राह में बड़ी चुनौतियाँ
हालाँकि जनता का समर्थन है, लेकिन उनकी राह आसान नहीं है:
- आर्मी अप्रूवल: सबसे पहले आर्मी चीफ़ जनरल अशोक राज सिग्देल की सहमति चाहिए।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति: इसके बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की मंजूरी ज़रूरी है।
- राजनीतिक समर्थन: नेपाल की संसदीय व्यवस्था में कई पार्टियों का सपोर्ट अनिवार्य है।
यानी जनता की माँग और संवैधानिक प्रक्रिया के बीच टकराव साफ दिख रहा है।
और कौन हैं पीएम रेस में?
सुषिला कार्की के अलावा और भी नाम चर्चा में हैं:
- कुल्मन घिसिंग – बिजली सेक्टर में सुधारों के लिए मशहूर।
- सागर ढकाल – युवा नेता, जिनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
- हरका सांपांग – धरान के मेयर, ग्रासरूट एक्टिविज़्म के लिए जाने जाते हैं।
ये सभी नाम दिखाते हैं कि जनता अब पारंपरिक नेताओं से हटकर नए विकल्प तलाश रही है।
सुषिला कार्की – एक झलक
- जन्म: 7 जून 1952, बिराटनगर
- शिक्षा: राजनीति विज्ञान (बीएचयू), कानून (त्रिभुवन यूनिवर्सिटी)
- कैरियर: 1979 में वकालत की शुरुआत, 2007 में सीनियर एडवोकेट
- न्यायिक भूमिका: सुप्रीम कोर्ट की स्थायी जज (2010), नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (2016–2017)
- विरासत: न्यायपालिका की स्वतंत्रता की सशक्त समर्थक
Gen Z क्यों कर रहे हैं विरोध?
नेपाल का युवा वर्ग सालों से राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और सत्ता संघर्ष से परेशान है। उनके लिए:
- सुषिला कार्की का मतलब है जवाबदेही और क़ानून का राज।
- ये आंदोलन सिर्फ उनके समर्थन में नहीं, बल्कि पुराने नेताओं के विरोध में भी है।
- सोशल मीडिया ने युवाओं की आवाज़ को और मज़बूत बना दिया है।
नेपाल के भविष्य पर असर
अगर सुषिला कार्की राजनीति में उतरती हैं और समर्थन पाती हैं तो ये बदलाव ला सकता है:
- नेपाल की राजनीति में नई दिशा और पारदर्शिता।
- टेक्नोक्रेट्स और प्रोफेशनल्स के लिए राजनीति का रास्ता खुल सकता है।
- युवाओं की राजनीति में भागीदारी और बढ़ेगी।
लेकिन संविधान, राजनीति और सेना से जुड़े अवरोध अभी भी बड़े सवाल हैं।
निष्कर्ष
नेपाल इस वक्त एक क्रॉसरोड्स पर खड़ा है। सुषिला कार्की को पीएम बनाने की माँग सिर्फ एक नेता को चुनने की नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की पुकार है – न्याय, पारदर्शिता और साफ-सुथरी राजनीति के लिए।
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